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New Delhi, NCR of Delhi, India
I am an Indian, a Yadav from (Madhepura) Bihar, a social and political activist, a College Professor at University of Delhi and a nationalist.,a fighter,dedicated to the cause of the downtrodden.....

Saturday, March 4, 2023

मुरहो एस्टेट के मंडल परिवार का गौरवशाली अतीत : 1923 में बिहार उड़ीसा विधान परिषद के निर्वाचित सदस्य : बाबू भुवनेश्वरी प्रसाद मंडल


बाबू भुवनेश्वरी प्रसाद मंडल, प्रसिद्द स्वतंत्रता सेनानी, समाज सुधारक और बिहार से भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के संस्थापक सदस्य बाबू रास बिहारी लाल मंडल के ज्येष्ठ पुत्र,(अन्य दो पुत्र बाबू कमलेश्वरी प्रसाद मंडल और बाबू बिंदेश्वरी प्रसाद मंडल / #BPMandal ), 1923 में बिहार उड़ीसा विधान परिषद के लिए, आज के संसदीय निर्वाचन क्षेत्र से तीन या चार गुना बड़े निर्वाचन क्षेत्र से चुने गए थे। भुवनेश्वरी बाबू लगभग 1932 से 1948 तक भागलपुर डिस्ट्रिक्ट बोर्ड के निर्वाचित चेयरमैन थे।
भारत सरकार अधिनियम 1919 के माध्यम से अधिनियमित मोंटेग्यू-चेम्सफोर्ड सुधारों ने बिहार और उड़ीसा विधान परिषद को 43 से 103 सदस्यों तक विस्तारित किया। विधान परिषद में अब 2 पदेन कार्यकारी पार्षद, 25 नामांकित सदस्य (12 आधिकारिक, 13 गैर-सरकारी) और 76 निर्वाचित सदस्य (48 गैर-मुस्लिम, 18 मुस्लिम, 1 यूरोपीय, 3 वाणिज्य और उद्योग, 5 जमींदार और विश्वविद्यालय निर्वाचन क्षेत्र 1 सदस्य शामिल किये गए। सुधारों के Dyarchy सिद्धांत को भी पेश किया, जिससे कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा और स्थानीय सरकार जैसी कुछ जिम्मेदारियां निर्वाचित मंत्रियों को स्थानांतरित कर दी गईं।
1923 में विस्तारित सदन के लिए हुए चुनाव में, 103 सदस्यों में से, वे सूची में मध्य भागलपुर गैर मुहम्मडन ग्रामीण निर्वाचन क्षेत्र (लिस्ट में संख्या 54) से सदन में चुने गए पिछड़े वर्ग के एकमात्र सदस्य थे।
दलित वर्ग के दो सदस्यों को मनोनीत किया गया था।
अन्य सभी सदस्य उच्च जाति के थे या अँगरेज़ थे।
मैं उनकी तस्वीर साझा कर रहा हूं जिसमें उनके सबसे बड़े बेटे न्यायमूर्ति राजेश्वर प्रसाद मंडल भी लॉन टेनिस रैकेट पकड़े हुए दिखाई दे रहे हैं, और माननीय सदस्यों की सूची, जिसमें पहले पृष्ठ पर उनका नाम उनकी खुद की लिखावट में है।
बिहार और उड़ीसा विधान परिषद
1924-29
माननीय खान बहादुर ख्वाजा मुहम्मद नूर - राष्ट्रपति।
चौधरी भगरात प्रसाद सामंतराय महापात्रा - उप अध्यक्ष।
श्री जे. ए. सॉन्डर्स, आईसीएस-सचिव।
माननीय सदस्य :
1. माननीय श्री मैकफर्सन, आईसीएस
2. माननीय श्री एस. सिन्हा।
3. माननीय सर सैय्यद मुहम्मद फखर-उद-दीन। खान बाबादुर (मंत्री)।
4, माननीय बाबू गणेश दत्ता सिंह (मंत्री)।
5. श्री ई. एल. एल. हैमंड (मनोनीत)।
6. श्री ई.एल. टान्नर। (मनोनीत)।
7. श्री जे.आर. दैन। (मनोनीत)।
8. श्री ए. एल. इंग्लिस (मनोनीत)।
9. श्री बी.ए. कोलिन्स। (मनोनीत)।
10. श्री डब्ल्यू.एस. ब्रेमनर, सीआईई (नामित)।
11. श्री एच. एल.आई. एल एलनसन। (मनोनीत)।
12. कर्नल एच. आइंसवर्थ। (मनोनीत)।
13. श्री बी.सी. सेन (मनोनीत)।
14. श्री डब्ल्यू स्वेन, सीआईई। (मनोनीत)।
15. श्री एच लैम्बर्ट (मनोनीत)।
16. श्री डब्ल्यू बी हेकॉक (मनोनीत)।
17. बाबू श्याम नारायण सिन्हा शर्मा - पटना प्रमंडल गैर मुस्लिम शहरी
18. श्री मुहम्मद यूनुस - पटना प्रमंडल मोहम्मडन अर्बन
19. बाबू चंडीपत सहाय। -पटना संभाग भूमि धारक।
20. महाराजा बहादुर गुरु महादेवाश्रम प्रसाद साही। पटना गैर-मोहम्मडन शहरी।
21. बाबू राजनधारी सिन्हा। पश्चिम पटना गैर-मोहम्मडन ग्रामीण
22. बाबू गुरु शाही लाल पूर्वी पटना गैर-मुहम्मडन ग्रामीण।
23. मौलवी सैय्यद मुहम्मद हुसैन - पूर्वी पटना मुहम्मडन ग्रामीण।
24. बाबू गुप्तेश्वर प्रसाद सिंह। पश्चिम गया गैर-मुबम्मदान ग्रामीण।
25. बाबू बिशुन प्रसाद। मध्य गया गैर-मुहम्मडन ग्रामीण
26. बाबू रामेश्वर प्रसाद सिंह। पूर्वी गया गैर-मुहम्मदें ग्रामीण।
27. खान बहादुर अशफाक इलुसैन।- गया मुहम्मडन रूरल
28. बाबू द्वारिका प्रसाद सिंह। आरा गैर-मुहम्मडन ग्रामीण।
29. बाबा शारदा प्रसाद सिंह - केंद्रीय शाहाबाद गैर-मुस्लिम ग्रामीण।
30. बाबू राजीवरंजन प्रसाद सिन्हा।- दक्षिण शाहाबाद गैर-मुस्लिम ग्रामीण।
31. श्री सैयद मुहम्मद अतहर हुसैन। - शाहाबाद मुहम्मडन ग्रामीण।
32. राय बहादुर द्वारिका नाथ। तिरहुत प्रमंडल गैर मुहम्मडन शहरी।
33. मौलवी मति-उर रहमान। - तिरहुत प्रमंडल मुबम्मदान अर्बन।
34. राय बहादुर कृष्णदेव नारायण महथा - तिरहुत संभाग के भू-स्वामी।
35. बाबू जलेश्वर प्रसाद। - उत्तर सारण गैर-मुहम्मडन ग्रामीण।
36. बाबू चंद्रकेतु नारायण सिंह।- दक्षिण सारण गैर-मुहम्मद-मदन कुराल।
37. मौलवी सैय्यद मुबारक अली -सारण मुहम्मदन ग्रामीण
38. बाबू लक्ष्मी मोहन मिश्रा। - उत्तरी चंपारण गैर मुस्लिम ग्रामीण।
39. बाबू केदारनाथ प्रसाद साह - दक्षिण चैनपरोन गैर-माबामदान ग्रामीण।
40. मौलवी मुहम्मद ज़बूरुल हक़- चंपारण मुहम्मडन रूरल।
41. बाबू शिव बचन सिन्हा। उत्तर मुजफ्फरपुर गैर मुस्लिम ग्रामीण।
42. महंत दर्शन दासजी। - पूर्वी मुजफ्फरपुर गैर मुहम्मडन ग्रामीण।
43. बाबू राधा कृष्ण। - हाजीपुर गैर-मुहम्मद- मदन ग्रामीण।
44. मौलवी सैय्यद मेंहदी हसन। - मुजफ्फरपुर मुहम्मडन ग्रामीण।
45. महंत ईश्वर गिर। - उत्तर-पश्चिम दरभंगा गैर-मुहम्मडन ग्रामीण।
46. बाबू शिव शंकर झा। - उत्तर-पूर्व दरभंगा गैर-मुहम्मडन ग्रामीण
47. बाबू राम निबोरा सिंह। - दक्षिण-पूर्व दरभंगा गैर-मुहम्मडन ग्रामीण
48. बाबू रामाश्रय प्रसाद चौधरी, - समस्तीपुर गैर-मुहम्मडन ग्रामीण
49. मौलवी सैद-उल हक। - दरभंगा मुहम्मडन ग्रामीण।
50. बाबू मुरलीधर श्रॉफ। -भागलपुर संभाग गैर-मुस्लिम शहरी।
51, श्री अब्दुल वहाब खान। भागलपुर डिवीजन मुहम्मडन शहरी ..
52. राजा बाबादुर कीर्त्यानंद सिंह। भागलपुर संभाग के जमींदार।
53. बाबू राजेन्द्र मिश्र। - उत्तर भागलपुर गैर मुहम्मदाव ग्रामीण।
54. बाबू भुवनेश्वरी प्रसाद मंडल। मध्य भागलपुर गैर-मुहम्मडन ग्रामीण।
ग्राम मुरहो, डाकघर मधेपुरा, जिला भागलपुर।
55. बाबू अनंत प्रसाद..- दक्षिण भागलौर गैर-मुस्लिम ग्रामीण।
56. खान बहादुर सईद मुहम्मद नईम - भागलपुर मुहम्मदन भागलपुर। ग्रामीण।
57. राय बहादुर लछमी प्रसाद सिन्हा। - पूर्वी मुंगेर गैर-मुहम्मडन ग्रामीण।
58. राय साहिब खड़ग नारायण - उत्तर-पश्चिम मुंगेर गैर-मुहम्मडन ग्रामीण।
59. महाराजा बहादुर चंद्र मौलेश्वर प्रसाद सिंह - दक्षिण-पश्चिम मुंगेर गैर मुहम्मडन ग्रामीण
60. श्री शाह मुहम्मद याह्या। - मोंगबीर महामदान ग्रामीण।
61. राय बहादुर पृथ्वीवी चंद लाल चौधरी। - पूर्णिया गैर-मुहम्मडन ग्रामीण।
62. श्री सैय्यद मोइन-उद-दीन मिर्जा। - किशनगंज मुहम्मडन ग्रामीण।
63. मौलवी मीर फैयाज अली। पूर्णिया ग्रामीण। मुसलमान
64. बाबू जोगेंद्र नारायण सिंह। - संथाल परगना (उत्तर) गैर-मुहम्मडन ग्रामीण
65. बाबू रामेश्वर लाल मारवाड़ी। - संथाल परगना (दक्षिण) गैर-मुहम्मडन ग्रामीण।
66. मनियावी मुहम्मद उम्मिदी अली। -संथाई परगना मुकमम्मन ग्रामीण।
67 श्री मधुसूदन दास, सी.एल.ई. - उड़ीसा डिवीजन गैर-मुहम्मडन शहरी।
68. मौलवी सैय्यद तजम्मुल अली। उड़ीसा डिवीजन मुहम्मद-मदन ग्रामीण।
69. राजा राजेंद्र नारायण भंजदेव, ओ.बी.ई. उड़ीसा प्रभाग, भू-धारक'।
70. बाबू बीराबर नारायण चंद्र धीर नरेंद्र। उत्तरी कटक गैर-मुहम्मडन ग्रामीण
71. बाबू लक्ष्मीबार महंती - दक्षिण कटक गैर-मुस्लिम ग्रामीण।
72. बाबू राधारंजन दास। -उत्तरी बालासोर गैर-मुहम्मडन ग्रामीण.-
73. चौधरी भगवत प्रसाद सामंतराय महापात्रा, उप राष्ट्रपति। दक्षिण बालासोर, गैर-मुहम्मदम ग्रामीण
74. बाबू गोदावरी मिश्रा। -उत्तरी पुरी, गैर महम्मदान ग्रामीण।
75. बाबू जगबंधु सिन्हा। - दक्षिण पुरी गैर मुहम्मडन ग्रामीण।
76. बाबू राम नारायण मिश्रा। - संबलपुर गैर-मुहम्मद ग्रामीण,
77. श्री जीमूत बहन सेन छोटा नागपुर डिवीजन गैर-मुहम्मडन शहरी।
78. मौलवी शेख मुहम्मद हुसैन। - छोटा नागपुर मंडल मुहम्मदन ग्रामीण।
79. बाबू नागेश्वर बक्स रे। - छोटा नागपुर डिवीजन पोस्ट लैंडहोल्डर्स'।
80. राय बहादुर शरत चंद्र रे।- रांची गैर-मुहम्मडन ग्रामीण।
81. बाबू कृष्ण बल्लभ सहाय। हजारीबाग गैर-मुहम्मडन ग्रामीण।
82. ठकुराई ब्रह्मेश्वर दयाल सिंह। पलामू गैर-मुहम्मडन ग्रामीण।
83. बाबू बख्शी जगदम प्रसाद लाल। उत्तर मानभूम गैर-मुहम्मडन ग्रामीण।
84. बाबू नीलकंठ चटर्जी। दक्षिण मानभूम गैर-मुहम्मडन ग्रामीण।
85. दुलु मानकी। -सिंगबबम गैर-मुहम्मडन ग्रामीण।
86. ********* पटना विश्वविद्यालय।
87. श्री पी. कैनेडी, सीआईई। यूरोपीय निर्वाचन क्षेत्र। रोपण निर्वाचन क्षेत्र।
88. श्री ई. सी. डेनबी.. ढोली कंसर्न
89. ********** इंडियन माइनिंग एसोसिएशन।
90. बाबू नरेंद्र नाथ मुखर्जी। इंडियन माइनिंग फेडरेशन
91. राजा बहादुर हरिहर प्रसाद नारायण सिंह, ओ.बी.ई. मनोनीत...
92. खान बहादुर नवाबजादा सैय्यद अल्ह्रफ-उद-अहमद। मनोनीत।
93. बाबू देवकी नंदन प्रसाद सिंह। मनोनीत।
94. राय बहादुर ज्योतिष चंद्र भट्टाचार्य। नामांकित (अधिवासित बंगाली समुदाय)।
95. श्री एफ.ई.एल. मॉरिसन। - मनोनीत (एंग्लो-इंडियन कम्युनिटी)।
96. रेवरेंड इमानुएल सुख। - मनोनीत दलित वर्ग।
97. बाबू विश्वनाथ कार - मनोनीत दलित वर्ग।
98. रेव. ई.एच.. व्हिटली। - नामांकित आदिवासी।
99. रेवरेंड प्रीतम लूथर सिंह - मनोनीत आदिवासी।
100. लाला बैज नाथ। - मनोनीत श्रमिक वर्ग।
101. श्री धनजीशाह मेहरजी- भाई मदन। - बागान और खनन के अलावा नामांकित औद्योगिक हित।
102. रेव. एस.के. तरफदार। नामांकित भारतीय ईसाई समुदाय।
103. श्री जे.ए. सॉन्डर्स, सचिव। पटना।
* सूची का अंत
बी और ओ। जी.पी. (एल.सी.) नं. 114-200-8-2-1924.-जे.एम.आर.
डॉ सूरज यादव मंडल द्वारा टाइप की गई सूची :
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Suraj Yadav and 4 others

Glorious Past of Mandal Family of Murho Estate : Babu Bhuvneshwari Prasad Mandal, Elected member of Bihar Orissa Legislative Council in 1923.

 Babu Bhuvneshwari Prasad Mandal, eldest son of Babu Rash Behari Lal Mandal, Freedom Fighter, Social reformer and founder Member of Indian National Congress from Bihar, (the other two sons being Babu Kamleshwari Parasad Mandal and Babu Bindeshwari Prasad Mandal or #BPMandal ), my grandfather, was elected to Bihar Orissa Legislative Council in 1923, from a constituency three or four times bigger than todays Parliamentary Constituency.

The Montagu–Chelmsford Reforms enacted through the Government of India Act 1919 expanded the Bihar & Orissa Legislative Council from 43 to 103 members. The Legislative Council now consisted of 2 ex-officio Executive Councillors, 25 nominated members (12 official, 13 non-official) and 76 elected members (48 Non-Muslim, 18 Muslim, 1 European, 3 Commerce & Industry, 5 Landholders and 1 University constituencies). The reforms also introduced the principle of dyarchy, whereby certain responsibilities such as agriculture, health, education, and local government, were transferred to elected ministers.
In the election held for the expanded house in 1923, of the 103 members, he was the only member belonging to the Backward Classes elected in the house from Central Bhagalpur Non Muhammadan Rural Constituency Number 54 in the List.
Two members of Depressed Classes were nominated.
All the other members belonged to upper caste.
I am sharing his photo in which his elsest son Justice Rajeshwar Prasad Mandal is also seen holding a lawn tennis racket, and the image of the List of Hon'ble Members which has his name in the first page in his own handwriting.

BIHAR AND ORISSA LEGISLATIVE COUNCIL

1924-29

The Hon'ble Khan Bahadur KHWAJA MUHAMMAD NUR - President.

Chaudhuri BHAGARAT PRASHAD SAMANTARAI MAHAPATRA -Deputy President.

 Mr. J. A. SAUNDERS, ICS.-Secretary.

Hon’ble MEMBERS :

1.  The Hon'ble Mr. McPherson, ICS

2.  The Hon'ble Mr. S. Sinha.

3. The Hon'ble Sir Saiyid Muhammad Fakhr-ud-din. Khan Babadur  (Minister).

4, The Hon'ble Babu Ganesh Datta Singh (Minister).

5. Mr. E. L. L. Hammond (Nominated).

6. Mr. E. L. Tanner.  (Nominated).

7. Mr. J. R. Dain. (Nominated).

8. Mr. A. L. Inglis  (Nominated).

9. Mr. B. A. Collins. (Nominated).

10. Mr. W. S. Bremner, CIE (Nominated).

11. Mr. H. Ll. L. Allanson. (Nominated).

12. Col. H. Ainsworth. (Nominated).

13. Mr. B. C. Sen. (Nominated).

14. Mr. W. Swain, CIE. (Nominated).

15. Mr H Lambert (Nominated).

16. Mr W B Heycock (Nominated).

17. Babu Shyam Narain Sinha Sharma  - Patna Division Non-Mohammadan Urban

18.Mr Muhammad Yunus – Patna Division Mohammadan Urban

19. Babu Chandipat Sahay. – Patna Divison Land Holders.

20.  Maharaja Bahadur Guru Mahadevashram Prashad Sahi. Patn Non-Mohammadan Urban.

21. Babu Rajandhari Sinha. West Patna Non-Mohammadan Rural

22. Babu Guru Shai Lal East Patna Non-Muhammadan Rural.

23. Maulavi Saiyid Muhammad Hussain - East Patna Muhammadan Rural.

24. Babu Gupteshvar Prashad Singh. West Gaya Non-Mubammadan Rural.

25. Babu Bishun Prashad. Central Gaya Non-Muhammadan Rural

26. Babu Rameshvar Prashad Singh. East Gaya Non-Muhammaden Rural.

27. Khan Bahadur Ashfaq Ilusain.- Gaya Muhammadan Rural

28. Babu Dvarika Prashad Singh. Arrah Non-Muhammadan Rural.

29. Baba Sarada Prashad Singh - Central Shahabad Non- Muhammadan Rural.

30. Babu Rajivaranjan Pra shad Sinha.- South Shahabad Non- Muhammadan Rural.

31. Mr. Saiyid Muhammad Athar Husain. - Shahabad Muhammadan Rural.

32. Rai Bahadur Dvarika Nath. Tirhut Division Non- Muhammadan Urban.

33. Maulavi Mati-ur Rahman. - Tirhut Division Mubammadan Urban.

34. Rai Bahadur Krishna Deva Narayan Mahtha - Tirhut Division Landholders'.

35. Babu Jaleshvar Prashad. - North Saran Non-Muhammadan Rural.

36. Babu Chandraketu Narayan Singh.- South Saran Non-Muham- madan Kural.

37. Maulavi Saiyid Mubarak Ali -Saran Muhammadan Rural

38. Babu Lakshmi Mohan Misra. - North Champaran Non- Muhammadan Rural.

39. Babu Kedarnath Prashad Sah - South Chainparon Non- Mabammadan Rural.

40. Maulavi Muhammad Zaburul Haqq- Champaran Muhammadan Rural.

41. Babu Shiva Bachan Sinha. North Muzaffarpur Non- Muhammadan Rural.

42. Mahanth Darshan Dasji. - East Muzaffarpur Non- Muhammadan Rural.

43. Babu Radha Krishna. - Hajipur Non-Muham- madan Rural.

44. Maulavi Saiyid Mehdi Hasan. - Muzaffarpur Muhammadan Rural.

45. Mahanth Ishvar Gir. - North-West Darbhanga Non-Muhammadan Rural.

46. Babu Shiva Shankar Jha. - North-East Darbhanga Non-Muhammadan Rural

47. Babu Ram Nibora Singh. - South-East Darbhanga Non-Muhammadan Rural

48. Babu Ramasray Prashad Chaudhuri, - Samastipur Non-Muhammadan Rural

49. Maulavi Said-ul Haqq. - Darbhanga Muhammadan Rural.

50. Babu Murlidhar Shroff. -Bhagalpur Division Non- Muhammadan Urban.

51, Mr. Abdul Wahab Khan. Bhagalpur Division Muhammadan Urban..

52. Raja Babadur Kirtyanand Singh. Bhagalpur Division Landholders.

53. Babu Rajendra Misra. - North Bhagalpur Non- Muhammadao Rural.

54. Babu. Bhuvaneshvari Prashad Mandal. Central Bhagalpur Non- Muhammadan Rural.

Village Murho, Post Office Madhipura,

District Bhagalpur.

55. Babu Anant Prashad..- South Bhagalour Non- Muhammadan Rural.

56. Khan Bahadur Sayid Muhammad Naim - Bhagalpur Muhammadan Bhagalpur.Rural.

57. Rai Bahadur Lachhmi Prashad Sinha. - East Monghyr Non-Muhammadan Rural.

58. Rai Sahib Kharag Narayan - North-West Monghyr Non-Muhammadan Rural.

59. Maharaja Bahadur Chandra Mauleshvar Prashad Singh -South-West Monghyr  Non         Muhammadan Rural

60. Mr. Shah Muhammad Yahya. - Mongbyr Mahammadan Rural.

61. Rai Bahadur Pritliwi Chand Lall Chowdry. - Purnea Non-Muhammadan Rural.

62. Mr. Saiyid Moin-ud-din Mirza. - Kishanganj Muhammadan Rural.

63.  Maulavi Mir Faiyaz Ali. Purnea Rural. Muhammadan

64. Babu Jogendra Narayan Singh. - Santhal Parganas (North) Non-Muhammadan Rural

65. Babu Rameshvar Lal Marwari. - Santhal Parganas (South) Non-Muhammadan Rural.

66. Maniavi Muhammad Umidy Ali. - Santhai Parganas Mukammadan Rural.

67 Mr. Madhusudan Das, C.L.E. - Orissa Division Non- Muhammadan Urban.

68. Maulavi Saiyid Tajamul Ali. Orisss Division Muham- madan Rural.

69. Raja Rajendra Narayan Bhanja Deo, O.B.E. Orissa Division, Land- holders'.

70. Babu Birabar Narayan Chandra Dhir Narendra. North Cuttack Non- Muhammedan Rural

71. Babu Lakshmidbar Mahanti -  South Cuttack Non- Muhammadan Rural.

72.Babu Radharanjan Das. -North Balasore Non- Muhammadan Rural.-

73. Chaudhuri Bhagabat Prashad Samantarai Mahapatra, Deputy President. South Balasore, Non- Muhammadam Rural

74. Babu Godavaris Misra. -North Puri, Non-Mehammadan Rural.

75. Babu Jagabandhu Sinha. - South Puri Non Muhammadan Rural.

76. Babu Ram Narayan Misra. - Sambalpur Non-Muhammadan Rural,

77. Mr. Jimut Bahan Sen. Chota Nagpur Division Non-Muhammadan Urban.

78. Maulavi Shaikh Muhammad Husain. - Chota Nagpur Division Muhammadan Rural.

79. Babu Nageshvar Bux Ray. - Chota Nagpur Division Post Landholders'.

80. Rai Bahadur Sharat Chandra Ray.- Ranchi Non-Muhammadan Rural.

81. Babu Krishna Ballabh Sahay.  Hazaribagh Non-Muhammadan Rural.

82. Thakurai Brahmeshvar Dayal Singh. Palamau Non-Muhammadan Rural.

83. Babu Bakshi Jagdam Prashad Lal. North Manbhum Non- Muhammadan Rural.

84. Babu Nilkantha Chattarji. South Manbhum Non- Muhammadan Rural.

85. Dulu Manki. -Singbbbum Non-Muhammadan Rural.

86. *********  Patna University.

87. Mr. P. Kennedy, CIE. European Constituency. Planting Constituency.

88. Mr. E. C. Danby.. Dholi Concern

89. ********** Indian Mining Associa- tion.

90. Babu Narendra Nath Mukharji. Indian Mining Federation.

91. Raja Bahadur Harihar Prashad Narayan Singh, O.B.E. Nominated...

92. Khan Bahadur Nawabzada Saiyid Alhraf-ud-au Ahmad. Nominated.

93. Babu Devaki Nandan Prashad Singh. Nominated.

94. Rai Bahadur Jyotish Chandra Bhattacharji. Nominated (Domiciled Bengali Community).

95. Mr. F. E. L. Morrison. - Nominated (Anglo-Indian Community).

96. Rev. Emanuel Sukh. - Nominated  Depressed Classes.

97. Babu Bishwa Nath Kar. - Nominated  Depressed Classes.

 98. Rev. E. H.. Whitley. – Nominated Aborigines.

99. Rev. Prittam Luther Singh - Nominated Aborigines.

100. Lala Baij Nath. - Nominated Labouring Classes.

101. Mr. Dhanjishah Meherji- bhai Madan. – Nominated Industrial Interests other than Plantation and Mining.

102. Rev. S. K. Tarafdar. Nominated Indian Christian Community.

103. Mr. J. A. Saunders, Secretary. Patna.

*End of List

B.&O. G. P. (L. C) No. 114-200-8-2-1924.-J.M.R.












Saturday, August 1, 2020

क्रीमी लेयर : आरक्षण पर हमला आरएसएस एजेंडा :

आरक्षण ऐसा कर देंगे कि इसका कोई मतलब नहीं रह जायेगा : भाजपा /आरएसएस 
 * रोजगार ख़त्म तो आरक्षण कहाँ? 
 * सरकारी प्रतिष्ठानों को निजी हाँथों में बेच देने पर आरक्षण समाप्त क्योंकि निजी क्षेत्र में आरक्षण नहीं 
 * लेटरल एंट्री के तहत आईएएस IAS में केंद्र सरकार के ज्वॉइंट सेक्रेटरी के शीर्ष पद पर, बिना परीक्षा / आरक्षण के सवर्णों की सीधी नियुक्ति। 
* उच्च न्यायिक व्यवस्था में आरक्षण नहीं। सर्वोच्च और उच्च न्यायालयों में 80 % ब्राह्मण। 
 * सर्वोच्च न्यायालय के माध्यम से आरक्षण निरस्त करने के नित्य नए आदेश : सरकार मौन। 
 * बिना डेटा के ओबीसी वर्गीकरण को कोशिश। 
 * मेडिकल एडमिशन वगैरह में बिना कोई नियम या कानून के ओबीसी आरक्षण समाप्त। 
 *आरक्षण के औचित्य पर प्रोपागंडा के तहत #गोदी_मीडिया में रोज प्रश्न, पर जाति जनगणना के आदेश नहीं.... आदि आदि। 
 अब क्रीमी लेयर के प्रावधान में फेर बदल कर लाखों ओबीसी को आरक्षण के दायरे से बाहर करने की साज़िश। सर्वोच्च न्यायालय में केस स्वीकार कर अनुसूचित जाति / जनजाति में भी क्रीमी लेयर लागू करने की कोशिश जारी..... 
 एक, क्रीमी लेयर असंवैधानिक है। दूसरा, अब उसके आय लिमिट बढ़ाने के नाम पर सैलेरी, खेती की आमदनी, गाँव की ज़मीन आदि को जोड़ने का प्रावधान कर आरक्षण को पूर्णतः आर्थिक आधार बना कर लाखों ओबीसी को इसके लाभ से वंचित कर दिया जाएगा। वैसे भी कहीं भी और कभी भी ओबीसी का 27% आरक्षण पूरा नहीं होता। इस सम्बंध में कोई डाटा सरकार के पास नहीं है। 
जाति जनगणना से स्थिति स्पष्ट हो जाती और देश के 54% से अधिक आबादी के साथ अन्याय और भेदभाव उजागर हो जाता। ओबीसी गणना से ओबीसी के हिस्से में आ रही नौकरी, संसाधन में हिस्सेदारी न पता चले, तो आरएसएस भाजपा मोदी की सरकार ने जाति जनगणना मना कर दिया है। 
आईये इस अन्याय के विरुद्ध आवाज उठाएं और संघर्ष करें। 

 जय मण्डल, जय भीम, जय भारत।

Wednesday, September 19, 2018

#DUSU चुनावों में #ईवीएम: भारत के चुनाव आयोग का इस सम्बन्धी 13.9.2018 का बयान क्यों भ्रामक है?


चुनाव आयोग ने दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव में प्रयोग #ईवीएम से किसी तरह से लेने देने से इंकार किया है, जबकि पिछले ही वर्ष चुनाव आयोग की सहमति से दिल्ली विश्वविद्यालय को ईवीएम फिर से मुहैया किया गया। इसके पहले भी चुनाव आयोग के आदेश पर ही पहली बार सरकारी कंपनी ईसीआईएल ने दिल्ली विश्वविद्यालय को सन 2006 में ईवीएम सप्लाई किया था। कोई भी व्यक्ति या संस्था बिना चुनाव आयोग के आदेश के ईवीएम प्राप्त नहीं कर सकता।
कुछ तथ्य:
शैक्षणिक वर्ष 2005-2006 में स्वामी श्रद्धानन्द कॉलेज छात्र संघ के चुनाव अधिकारी के रूप में, मैंने ईवीएम मशीनों के द्वारा कॉलेज छात्र संघ चुनाव आयोजित करने के लिए ईवीएम मशीनों को उधार देने के लिए भारत के निर्वाचन आयोग से संपर्क किया था। वह पहली बार #ईवीएम का छात्र संघ चुनाव में प्रयोग होता।
चूंकि तब चुनाव बहुत नजदीक था,(2 सितंबर, 2005), अतः भारत का निर्वाचन आयोग, अपने दिनांक 25 अगस्त, 2005 के पत्र संख्या 51/8/4/2005-पीएलएन -4 से प्रिंसिपल, स्वामी श्रद्धानन्द कॉलेज को सूचित किया गया कि "आयोग आपके द्वारा अनुरोध किए गए इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों को उधार देने की स्थिति में नहीं है।" (उस समय का, बतौर चुनाव अधिकारी, मेरे द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति की प्रति, संलग्न है।)
हालांकि, अगले वर्ष, 2006 में, दिल्ली विश्वविद्यालय ने घोषणा की कि आने वाले दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्र संघ (डीयूएसयू) चुनाव एक से अधिक तरीकों से ऐतिहासिक होंगे। हाई-टेक जाकर, वे पार्टियों को एसएमएस और ई-मेल जैसे दिन के संचार उपकरण का उपयोग पर ध्यान देने की इच्छा रखते हैं। परन्तु विशेष बात यह थी कि इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (#ईवीएम) का इस्तेमाल देश के विश्वविद्यालय चुनावों में पहली बार किया जाना था।(यह समाचार 'द हिंदू' समेत कई समाचार पत्रों में यह रिपोर्ट छपा था। 24 अगस्त, 2006 'द हिन्दू' अखबार का स्क्रीनशॉट संलग्न है। लिंक है: Electronic voting machines for DUSU elections now https://www.thehindu.com/…/electronic-vo…/article3095105.ece....। (परसों से द हिन्दू ने इस लिंक से समाचार हटा लिया है। )
चुनाव आयोग ने विश्वविद्यालय की जरूरतों के अनुरूप विशेष रूप से डिजाइन की गई मशीनों का आदेश दिया था।
दिल्ली विश्वविद्यालय के तत्कालीन प्रोक्टर प्रोफेसर गुरमीत सिंह, जो वर्तमान में पांडिचेरी विश्वविद्यालय के कुलपति के रूप में कार्यरत हैं, ने उस समय कहा था कि, "विश्वविद्यालय को केवल 18 अगस्त को ही ईवीएम मशीनों के लिए औपचारिक अनुमति मिली।... इस ईवीएम में हमारे लिए अलग आवश्यक सुविधाएं देनी हैं। अलग अलग पोस्ट के लिए कई छात्र चुनाव लड़ेंगे। मशीन का इस्तेमाल कॉलेज यूनियन चुनावों के लिए भी किया जाएगा, इसलिए हम उन आम मशीनों का इस्तेमाल नहीं कर सकते थे जिनका इस्तेमाल आम चुनावों के लिए किया जाता था।''
ऐसा कहा जाता था कि ईसीआईएल ने ईसीआई के निर्देशों पर ईवीएम को दिल्ली विश्वविद्यालय को आपूर्ति की थी। यह वास्तव में दिलचस्प है कि भारत के निर्वाचन आयोग ने दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्र संघ चुनावों में इस्तेमाल ईवीएम से किसी भी तरह से कोई लेने देने से इंकार कर दिया है। (चुनाव आयोग की 13.9.18 दिनांकित पत्र की प्रतिलिपि संलग्न है।)
उस समय दिल्ली विश्वविद्यालय ने मशीनों की लागत प्रत्येक मशीन के लिए अनुमानित राशि लगभग 10,000 रु प्रति मशीन माना था। प्रोफेसर गुरमीत सिंह ने कहा, "हम यह राशि अग्रिम एडवांस दे सकते हैं और फिर व्यय का एक हिस्सा कॉलेजों को स्थानांतरित कर सकते हैं। '
तदनुसार इसलिए सभी कालेजों को प्रत्येक चुनाव में #ईवीएम के इस्तेमाल के लिए कुछ राशि विश्वविद्यालय को देना पड़ता हैं। उदहारण के लिए पिछले वर्ष स्वामी श्रद्धानन्द कॉलेज छात्र संघ चुनाव के चुनाव अधिकारी के रूप में मैंने किंस्वे कैंप स्थित विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव कण्ट्रोल रूम में ईवीएम वापस सौंपते समय 34,000/ - रुपये का डिमांड ड्राफ्ट सौंप कर, रसीद प्राप्त की।
पिछले साल, ईवीएम की समस्या फिर से हुई थी। चूंकि केवल कुछ ही ईवीएम दिए जाते हैं, जिससे मतदान के दौरान छात्रों की लंबी कतार हो जाती है, अतः हम, स्वामी श्रद्धानन्द कॉलेज की ओर से विश्वविद्यालय से अधिक ईवीएम मांगे थे। इस बीच, हमें पता चला कि विश्वविद्यालय भी ईवीएम की कमी के कारण समस्याओं का सामना कर रहा था और ईसीआई से अनुरोध किया था कि वह या तो ईवीएम किराए पर दे या विश्वविद्यालय को खरीदने की अनुमति दें, जैसा कि पहले किया गया था। प्रारंभ में, आयोग ने इनकार कर दिया, क्योंकि उन्होंने कुछ अन्य विश्वविद्यालयों से इनकार कर दिया था, लेकिन फिर आयोग की बैठक के बाद दिल्ली विश्वविद्यालय को #ईवीएम प्राप्त करने के बाद अनुमति दी गई थी। इस मामले की जानकारी संबंधित कार्यालयों के साथ उपलब्ध है।
अब ईवीएम के कार्यप्रणाली पर: हर साल, ईवीएम कंपनी के तकनीकी विशेषज्ञ, आवश्यकता के अनुसार ईवीएम को प्रोग्राम करने के लिए विश्वविद्यालय आते हैं। यह प्रग्रामिंग प्रति पद पर चुनाव लड़ रहे प्रत्याशियों के अनुरूप लिया जाता है। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि अलग-अलग पदों के लिए अलग-अलग पोलिंग पैनल (मतदान बोर्ड की इकाइयां) होती हैं, जबकि वोट यानि सूचनाओं को संग्रहित करने के लिए एक ही नियंत्रण इकाई (कण्ट्रोल पैनल) होता है। इसमें परेशानियाँ हो सकती है। कुछ इसी तरह कि शिकायत 2018 में माननीय दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा निपटाए गए याचिका (संजय बनाम दिल्ली विश्वविद्यालय और अन्य) में उल्लिखित शिकायतें हो सकती हैं। इस पेटिशन में बताया गया कि एक ही कॉलेज में मतदान करने वाले एक ही संख्या के छात्रों के मतगणना में अलग अलग वोट पाए हए। विभिन्न पदों के लिए मतदान किए गए विभिन्न मतों से संबंधित पेटीशन के प्रासंगिक हिस्सों की प्रतिलिपि संलग्न है।
इस साल भी यह जानना महत्वपूर्ण है कि कौन से कॉलेज ईवीएम दोषपूर्ण थे?
(डॉ सूरज यादव)

#EVM in #DUSU Elections : why is ECI letter of 13 Sept, 2018 misleading?


Only last year ECI permitted Delhi University to procure more EVMs, just as in 2006, #EVMs in DUSU Elections were introduced with permission and consent of ECI from ECIL.
Some Facts:
As Election Officer for Swami Shraddhanand College Students Union in the Academic Year 2005-2006, I had approached the Election Commission of India for lending EVM Machines to conduct the College Students Union Elections with EVMs, which would have been for the first time.
The Election Commission of India, since the time for the elections (2nd September, 2005) was very short had vide letter No. 51/8/4/2005-PLN-IV, dated 25th August, 2005 informed the Principal, Swami Shraddhanand College that the "Commission is not in a position to lend Electronic Voting Machines as requested by you." (Copy of the Press Release issued by me then, as the Election Officer is attached.)
However, next year, that is in 2006, Delhi University announced that the upcoming Delhi University Students' Union (DUSU) elections will be historic in more ways than one. Going hi-tech, they will see parties vying for attention using the communication tools of the day like SMS and e-mails, while electronic voting machines (EVM) will perhaps be used for the first time in university elections in the country. (Reported in Newspapers, including The Hindu,August 24, 2006 : Screenshot attached, Link : Electronic voting machines for DUSU elections now https://www.thehindu.com/…/electronic-vo…/article3095105.ece..). (The news was removed by The Hindu from yesterday. However, screen shot and the matter is attached.)
The Election Commission had ordered specially designed machines to suit the needs of the University.
Prof Gurmeet Singh, the then Proctor, Delhi University, currently serving as the Vice Chancellor, Pondicherry University said, ""The University got formal permission for the machines only on August 18. The requirements we have are different. There is one post, which many students will be standing for. The machine will also be used for the college union elections, so we couldn't have used the same machines that were used for the general elections.''
It was said that ECIL, on instructions from ECI had supplied the EVMs to University of Delhi. It is indeed intriguing that why did Election Commission of India, hurriedly issued a letter (Dated 13.9.18, Copy attached), denying anything to do with the EVM in question at Delhi University Students Union Elections.
Further, Delhi University was working out the cost of the machines, is was stated that the rough estimate for each machine is about Rs. 10,000. The University was then trying to work out how to share the costs of the machines. Prof Gurmeet Singh added,"We might give an advance and then transfer a part of the expenditure to the college.'
Accordingly, every College using the EVM supplied by University of Delhi for the Students Union Election pay in Demand Draft, while handing back the EVMs at the Central Control Room. The amount varies as per use of the machines. Therefore, last year, ie in 2017, I, as Election Officer of Swami Shraddhanand College, personally handed over a Demand Draft, while I went along with Delhi Police escort to the Control Room at the Police Lines, Kingsway Camp, Delhi, an amount of Rs 34,000/-, as far as I remember, and obtained a receipt.
Last year, there was again a problem of EVMs. Since only few EVMs are given, leading to long queue of students during polling, we (Swami Shraddhanand College),had asked for more EVMs from the University . Meanwhile, we came to know that the University too was facing problems due to shortage of EVMs and had requested the ECI to either give EVMs on rent or allow the University to procure, as done earlier. Initially, the Commission refused, because they had also refused to some other Universities, but later permission was granted after a meeting of the Commission and University obtained EVMs. The information of the matter is available with concerned offices.
Now coming to the functioning of the EVMs : Every year, technical experts, from the Company come to the University to program the EVMs as per the requirement, that is the candidates and posts. It is important to note that while there are different balloting units for different posts, there is one and the same control unit for storing the information, ie the votes, number for different candidates contesting for different posts. There may be complaints, as reflected in a Petition (Sanjay Vs University of Delhi & ors) disposed by Hon'ble Delhi High Court in 2018, pertaining to different number of votes polled for different posts. (Copy of the relevant portions of the Petition attached.) Even this year it is important to know which College(s) EVMs were faulty?

Thursday, August 30, 2018

Splendid speech by Dr Suraj Mandal on B P Mandal 100th Birth Anniversar...



पूरे देश में जगह जगह मंडल जयंती का सफल आयोजन हुआ। लखनऊ के उर्दू अकादमी में सामाजिक न्याय संगठन, सामाजिक न्याय मोर्चा और सोशलिस्ट आँगन के बैनर तले 25 अगस्त, 2018 को रामस्वरूप वर्मा और बीपी मंडल B.P.Mandal की जयंती मनाई गई। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि पूर्व मंत्री सुखदेव राजभर जी थे साथ में कई जाने माने पत्रकार, प्रोफेसर, लेखक, सामाजिक कार्यकर्ताओं का मंच पर जमावड़ा भी था। इस कार्यक्रम में सभी वक़्ताओ ने मंडल आयोग की सिफ़ारिशों को पूरी तरह लागू न किये जाने की चिंता ज़ाहिर की साथ ही पिछडा-दलित-अल्पसंख्यक समाज के खिलाफ आरएसएस-भाजपा के सडयंत्र पर भी बात रखी। आरएसएस-भाजपा की पिछड़ो के प्रति नीति पर ज़्यादातर वक्ताओ ने एक स्वर में कहा कि पिछड़े समाज की सबसे ज्यादा विरोधी पार्टी भाजपा ही है। इस कार्यक्रम में उन सभी क्षेत्रीय दलों की आलोचनाओं हुई जिनकी राजनीति या यूँ कहें कि जिन्होंने मंडल की राजनीति के दम पर ही कई बार सत्ता का सुख भोगने का मौक़ा मिला लेकिन पिछड़े समाज का सम्पूर्ण उत्थान फिर भी सम्भव न हो सका। दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर रतन लाल Dr Ratan Lal ने कहा कि अखिलेश और मायावती ने एक्सप्रेसवे बनाकर लखनऊ से दिल्ली की दूरी छ: घंटे तो कम कर दी गई लेकिन मुझे इंतज़ार है कि सामाजिक न्याय एक्सप्रेसवे कब बनेगा? जिसपर चलकर दलित-पिछड़े-पासमांदा अपना संवैधानिक हक लेंगे। वही दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर Dr Suraj Yadav Mandal जी (बीपी मंडल के पौत्र) ने मंडल जयंती पर मनुवादियों द्वारा शुद्धिकरण की ओर ध्यान खिंचते हुए कहा कि अखिलेश यादव के सत्ता से बेदख़ल होने के बाद आठ दिनों तक मुख्यमंत्री आवास का शुद्धिकरण होता रहा बस इसलिये क्योंकि अखिलेश शुद्र थे। इससे ज्यादा शर्म की बात क्या होगी की हमारे समाज को इस तरह से मनुवादी लोग लगातार ज़लील करते रहे हैं? सामाजिक न्याय के प्रति बहुजन समाज को लगातार जागरूक कर रहे Manoj Socialist Yadav जी Frank Huzur शुक्रिया जिन्होंने इस कार्यक्रम का सफल आयोजन कराया। और इनके साथी अंकुश यादव Ankush Yadav , Maitreya Gautam Gorakhnath Yadav Sachendra Pratap Yadav जैसे युवाओं का भी शुक्रिया जिन्होंने अपना जिवन सामाजिक न्याय की अवधारणा को साकार करने के लिये समर्पित कर दिया है। जय मंडल, जय अम्बेडकर, जय भारत।

Tuesday, August 14, 2018

लाल क़िला पर राष्ट्रिय ध्वज :

क्या आपने कभी सोचा है कि देश के स्वंत्रता दिवस यानि 15 अगस्त को प्रधान मंत्री दिल्ली लाल क़िला पर ही क्यों राष्ट्रिय ध्वज फहराते हैं ? किसी अन्य ऐतिहासिक ईमारत या कोई बड़ी आधुनिक शासकीय बिल्डिंग या अपने कार्यालय पर ही क्यों नहीं ?
15 अगस्त पर लाल क़िले पर राष्ट्रिय ध्वज फहराए जाने के पीछे जन भावनायें, लाल क़िला का देश की सार्वभौमिकता और सम्प्रभुता का प्रतीक होना, ऐतिहासिक घटनाक्रम और सामाजिक मान्यताएँ हैं। किसी भौगोलिक क्षेत्र या जन समूह पर सत्ता या प्रभुत्व के सम्पूर्ण नियंत्रण पर अनन्य अधिकार को सम्प्रभुता (Sovereignty) कहा जाता है। सार्वभौम सर्वोच्च विधि निर्माता एवं नियंत्रक होता है यानि संप्रभुता राज्य की सर्वोच्च शक्ति है। चुकी अंग्रेज़ों से पहले भारत बादशाह मुग़ल साम्राज्य के शासक लाल क़िला में रहते थे, अतः यह हिंदुस्तान की सत्ता का सर्वोच्च स्थान या केंद्र, सम्प्रभुता का प्रतीक था।
इसे विस्तार से समझने के पहले इतना जान लें की ब्रिटिश साम्राज्य का भारत में मुक़म्मल शुरुआत 1858 में ब्रिटिश सेना द्वारा लाल क़िला पर कब्ज़ा करने के बाद, आखिरी मुग़ल बादशाह बहादुर शाह ज़फर को गिरफ्तार कर, लगभग सभी शाहजादों का क़त्ल करने के बाद और लाल क़िला पर ब्रिटिश यूनियन जैक (झंडा) के फहराने से शुरू हुई थी। वैसे तो 1757 में ब्रिटेन की व्यापार कम्पनी, ईस्ट इण्डिया कम्पनी, के फ़ौज द्वारा लार्ड क्लाइव के नेतृत्व में बंगाल के नवाब सिराज-उद-दउला को प्लासी के युद्ध में हराने के बाद से ही भारत में ब्रिटिश हुकूमत की नींव डाली जा चुकी थी। धीरे धीरे ईस्ट इण्डिया कम्पनी के ताक़त के आगे बंगाल के नवाब, मराठा, मैसूर के हैदर अली, टीपू सुल्तान, पंजाब के महाराज रंजीत सिंह और सिख शासक घुटने टेक दिए थे। कम्पनी राज से मुक्ति के लिए आखिरी और एक बड़ी संघर्ष 1857 के ग़दर के रूप में हुई। पर अन्ततः ब्रिटिश फिर जीत गए। और भारत का शासन ईस्ट इण्डिया कम्पनी से सीधे ब्रिटिश राज के हाँथ में चली गई और ब्रिटिश महारानी विक्टोरिया भारत की साम्राज्ञी घोषित की गयी। 1877, 1903 और 1911 तीन बार भारत में ब्रिटिश दरबार हुए, जब क्वीन विक्टोरिया, सम्राट जॉर्ज पंचम और क्वीन मेरी को भारत के सम्राट या सम्राज्ञी घोषित किये गए। इस बीच 1911 में ही दिल्ली के दरबार में यह घोषणा हुई कि भारत में ब्रिटिश भारत की राजधानी का स्थानांतरण कलकत्ता से दिल्ली की गई। राजधानी को दिल्ली में स्थानांतरित करने का निर्णय शहर के प्रतीकात्मक महत्व से प्रेरित था और इस बात से भी कि लोगों के दिल दिमाग में मुगलों की राजधानी दिल्ली ही भारत की राजधानी समझी जा रही थी।
हालाँकि आखिरी मुग़ल बादशाह के शासन के काल में जब मुग़ल हुकूमत मात्र 'लाल क़िला से पालम तक' थी, फिर भी लाल क़िला में रहने वाले बादशाह को भारत का शासक ही माना और जाना जाता था। इतिहासकारों के अनुसार लाल क़िला "ब्रिटिश शाही प्रभुत्व का सबसे प्रामाणिक प्रतीक" प्रतीत होता है - यह वह स्थान था जहां अंतिम मुगल सम्राट और 1857 के विद्रोह के प्रशंसित नेता की कोशिश की और निर्वासित किया गया था।
1857 के बाद लगभग एक शताब्दी के बाद फिर लाल किला स्वतंत्रता से पहले के वर्षों में क्षितिज पर उभरती है। 1940 के दशक में स्वतंत्रता आंदोलन की परिस्थितियों के साथ प्रतीत होता है कि मुगल सम्राट और उसके परिवार के जीवन में लोगों की रुचि बढ़ रही थी। लाल किले की पसंद भारत के प्रमुख सार्वजनिक कार्यक्रम के लिए साइट के रूप में "सीधे, प्रतीकात्मक रूप से, 1857 के ऐतिहासिक गलतियों को स्थापित करने की इच्छा का नतीजा नहीं था" - बल्कि लाल क़िला "परोक्ष रूप से 1857 की अव्यवस्थित विद्रोह की स्मृति के दमन से स्थापित ब्रिटिश भारत साम्राज्य की राजधानी में प्रमुख गैर औपनिवेश ईमारत और पहचान" के रूप में था।
1940 में सुभाष चंद्र बोस और उनके द्वारा स्थापित आज़ाद हिंद फौज या भारतीय राष्ट्रीय सेना (आईएनए) ने रंगून में बहादुर शाह जफर के कब्र से ही "दिल्ली चलो" का नारा दिया। नेताजी ने आज़ाद हिन्द फौज को सम्बोधित करते हुए कहा कि "आपका कार्य तब तक खत्म नहीं होगा जब तक कि हमारे सेना नायक पुरानी दिल्ली के लाल क़िले में ब्रिटिश साम्राज्य के कब्रिस्तान पर विजय परेड नहीं करती"।
इधर 1945-1946 के आईएनए ट्रायल (मुक़दमा) ने एक बार फिर लाल किले को स्पॉटलाइट में ले आया। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद, आईएनए के गिरफ्तार अधिकारियों पर दिसंबर 1945 में लाल किले में सार्वजनिक सैनिक मुक़दमा के लिए पर रखा गया था। तीन अधिकारियों, कर्नल शाह नवाज खान, कर्नल प्रेम कुमार सहगल और कर्नल गुरबक्श सिंह ढिल्लों को, जेल में परिवर्तित कर, वहां रखा गया था। पूरे देश का ध्यान तब लाल क़िले में चल रहे इस मुक़दमा पर था, जहाँ इन देशभक्तों में चल रहे मुक़दमें और उसमें बचाओ के लिए देश की भावनाएँ जुडी हुई थी। स्थिति यह थी कि लोग जबरन लाल क़िला पर धावा बोल सकते थे।
अतः अगस्त 1947 को, भारत के पहले प्रधान मंत्री जवाहरलाल नेहरू ने लाल क़िले के लाहौरी गेट के ऊपर भारतीय राष्ट्रीय ध्वज को फहराया। नेहरू अपने भाषण में नेताजी का विशेष उल्लेख किया, इस अवसर पर उनकी अनुपस्थिति पर अफ़सोस ज़ाहिर की। 15 अगस्त को पहली कैबिनेट की शपथ लेने के एक दिन बाद लाल क़िला पर ब्रिटिश ध्वज की जगह भारत के राष्ट्रीय झंडे को फहराए जाने से यह सुनिश्चित हो गया कि अब भारत का सार्वभौम सत्ता भारतीयों के हाँथ में वापस आ चुका है।
परन्तु आज लाल क़िला को ही रख रखाओ के नाम पर गिरवी पर रख दिया गया है। इससे न सिर्फ जनभावनाओं का अनादर हुआ है बल्कि भारत की सार्वभौमिकता और सम्प्रभुभता का हनन हुआ है।
आखिरी मुग़ल बादशाह बहादुर शाह ज़फर को गिरफ्तार कर, दिल्ली के खूनी दरवाजा पर उनके बच्चों को फांसी पर लटका कर, 1857 के गदर के सिपाहियों को सजा-ऐ-मौत देकर अंग्रेज़ों ने भारत के सम्प्रभुता का प्रतीक लाल किला पर अपना झंडा यूनियन जैक फहराया था। भारत को आज़ाद करने का सपना लिए सुभाष चंद्र बोस ने आज़ाद हिन्द फौज से यह कहते हुए कि "तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आज़ादी दूंगा", "दिल्ली चलो" का नारा दिया था, जिसका मक़सद लाल क़िले पर तिरंगा फहराना था। परन्तु आज़ादी के संघर्ष और दी गयी हज़ारों शहीदों के शहादत की परवा किये बगैर, लाल क़िला को रखरखाव के नाम पर 25 करोड़ रुपये पर 5 साल के लिए एक कॉर्पोरेट डालमिया भारत को बेच दिया है।लाल क़िला पर पर्यटकों से होने वाली आमदनी 30 करोड़ रुपये सालाना है।
25 करोड़ में 5 साल के लिए डालमिया भारत कॉर्पोरेट को दे रहा है। उन्हें जो कोई हेरिटेज एक्सपर्ट नहीं हैं। उन्हें जो साधारण शब्दों में मुनाफाखोर हैं।
जैसे दिल्ली में विश्वविद्यालय मेट्रो को हीरो होण्डा मेट्रो के नाम का पट्टा लगा दिया गया है, वैसा ही कुछ देश के सम्प्रभुता का प्रतीक लाल क़िला का होगा।
यह सिर्फ निंदनीय ही नहीं, निश्चित तौर से राजद्रोह है।
क्या हमें देश की आज़ादी की लड़ाई फिर लड़नी है?