About Me

My photo
New Delhi, NCR of Delhi, India
I am an Indian, a Yadav from (Madhepura) Bihar, a social and political activist, a College Professor at University of Delhi and a nationalist.,a fighter,dedicated to the cause of the downtrodden.....
Showing posts with label BJP. Show all posts
Showing posts with label BJP. Show all posts

Friday, January 5, 2018

यूं ही नहीं कोई #फेकू कहलाता है ! झूठ और फरेब के फैक्ट्री हैं #साहेब और उनके #भक्त।

यूं ही नहीं कोई #फेकू कहलाता है !
झूठ और फरेब के फैक्ट्री हैं #साहेब और उनके #भक्त।
2017 के सबसे जबरदस्त 'फेक न्यूज' (फ़र्ज़ी समाचार या पोस्ट) #साहेब और #भक्तों नाम !
1. प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी की अहमदाबाद से मेहसाना के एक सी प्लेन पर उड़ान को भारत की तरफ से सबसे पहले समुद्री विमान सेवा के रूप में प्रचारित किया गया था। यह दावा प्रधान मंत्री मोदी की निजी वेबसाइट www.narendramodi.in द्वारा किया गया जिसे बाद में भाजपा कार्यकर्ताओं और मुख्यधारा के #गोदी_मीडिया द्वारा जोर-शोर से दोहराया गया था। हालांकि, सच्चाई यह है कि 2010 में अंडमान और निकोबार द्वीपों में जल हंस द्वारा पहली बार सी प्लेन सेवा शुरू गया था।
2. भारत के पहले सीपलेन के दावे की तरह, भारत के पहले मेट्रो दिल्ली मेट्रो के दावा आया। यह दावा एक भाषण में प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने दावा किया था। प्रधान मंत्री मोदी ने दावा किया कि पूर्व प्रधानमंत्री वाजपेयी 2002 में देश की पहली मेट्रो सेवा पर यात्री थे। हालांकि, भारत में पहली मेट्रो सेवा 1984 में कोलकाता में शुरू हुई थी।
3. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की विधानसभा चुनाव की पूर्व संध्या पर गुजरात के सोमनाथ मंदिर की यात्रा पर विवाद उभरा था, जब दावा किया गया था कि उन्होंने मंदिर में प्रवेश के लिए गैर हिंदुओं के लिए रजिस्टर पर हस्ताक्षर किए थे। मूल रूप से ज़ी गुजरात के एक पत्रकार ने प्रकाशित किया, और यह फ़र्ज़ी 'न्यूज़' मुख्यधारा के मीडिया की सबसे बड़ी कहानी थी। बाद में यह सामने आया कि प्रविष्टि वास्तव में किसी और के द्वारा बनाई गई थी और यह ऐसा प्रतीत करने के लिए गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया था कि राहुल गांधी ने इसे हस्ताक्षर किया था। मूल प्रवेश नियमित मंदिर रजिस्टर में किया गया था।
4. #टाइम्स_नाउ ने प्राइम टाइम पर एक कहानी की, जिसमें उन्होंने दिखाया कि किस तरह गाय का वध के पहले कैसे उस पर 'अत्याचार' किया गया था। कहानी के लिए हैशटैग #CowSlaughterCruelty था, और पशुओँ पर क्रूरता दर्शाया गया था। यह वीडियो में से एक वास्तव में मवेशियों के गर्भाशय मरोड़ के रूप में जाना जाता है, और गर्भवती मवेशियों के इलाज के लिए एक पशु चिकित्सक प्रक्रिया है।
5. उडुपी-चिकीमोगलूर के भाजपा सांसद शोभा करंदलाजे ने आरोप लगाया कि परेश मेस्टा, जो राज्य के उत्तरा कन्नड़ जिले में होनवानावर शहर में झील में मृत पाया गया, की 'जिहादी तत्वों' ने क्रूरता से अत्याचार और हत्या कर दी थी। बाद में जांच के बाद यह झूठ पाया गया।
6. 2012 में फिलिस्तीन में ली गयी एक तस्वीर जिसमें में एक आदमी को अपने पैरों के साथ एक बाइक से बाँध कर घसीटते हुए दिखाई पड़ा, को सोशल मिडिया पाकिस्तान का बताया गया। फोटो के साथ कैप्शन में लिखा था, 'यह एक हिंदू है जो पाकिस्तान में जय श्रीराम का नारा लगा रहा था। इस पोस्ट को इतना साझा करें कि प्रत्येक हिन्दू इसे देखे।'
7. भाजपा सांसद किरण खेर ने सैनिकों के ट्विटर अकाउंट पर एक तस्वीर पोस्ट की, जो बेहद ठंड के मौसम से जूझ रहे एक सैनिक का था। उसने ट्वीट किया कि यह सियाचिन में तैनात भारतीय सेना के सैनिकों की तस्वीर है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा वह तस्वीर दरअसल रूसी सेना के सैनिकों की थी।
8. रतन शारदा, आरएसएस के विचारक और विचारधारा और कई अन्य लोगों ने एक संदेश को ट्वीट किया, जिसमें दावा किया गया था कि ए राजा और कनिमोझी को बरी कर रहे 2 जी घोटाले के फैसला देने वाले न्यायाधीश ओपी सैनी पंजाब के सबसे कम उम्र के विधायक अंगद सैनी के पिता हैं। यह जानकारी गलत साबित हुई क्योंकि दोनों का कोई सम्बन्ध नहीं हैं। शारदा ने बाद में अपनी ट्वीट को हटा दिया।
9. गुरमेहर कौर (लेडी श्री राम कॉलेज की छात्रा, शहीद की बेटी) का वीडियो, जिसमें उसे 'रसके कमर'गाते बताया गया, उसका था ही नहीं। किसी और का था।
10. चंडीगढ़ में आईएएस की बेटी, वर्णिका कुंडू, जिसने हरियाणा भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पर 'किडनैप' के प्रयास का आरोप लगाया, किसी और के फोटो को उसका बता कर भाजपा प्रवक्ता साइना आईसी ने उसे बदनाम किया।
11. कन्हैया कुमार के जेएनयू सभा के वीडियो में पाया गया कि भारत विरोधी ऑडियो ऊपर से डाला गया था।
12. संबित पात्रा ने एक फोटोशॉप तस्वीर को भारतीय सैनिकों का कह कर शेयर किया।
13. भाजपा प्रवक्ता नूपुर शर्मा ने गुजरात दंगों के फोटो को बंगाल का कह कर प्रोटेस्ट आयोजित किया।
14. बाबुल सुप्रियो एक गलत तस्वीर को गुजरात के राजकोट के बस स्टैंड का कह कर शेयर किया।
15. केरल भाजपा नेता के सुदर्शन ने गाय के कत्ले आम का फोटोशॉप तस्वीर फूक पर शेयर किया।
16 .सबसे दिलचस्प था भोजपुरी फिल्म की एक सीन को बंगाल में बसीरहाट में हुए महिला के साथ अभद्रता बता कर शेयर किया गया।
17. पियूष गोयल ने विदेश की एक तस्वीर को अपने मंत्रालय के प्रयास से रौनक एक सड़क को बताया।

Tuesday, November 10, 2015

समीक्षा क्यों नहीं ? भाजपा टिकट बिकता है ?


अगर लोक सभा चुनाव में बिहार के परिणाम की समीक्षा हुई होती तो विधान सभा चुनाव में भाजपा की यह फजीयत नहीं होती। दरअसल बात मोदी लहर में बिहार के इस इलाके से 7 - 8 सीटें हारने को लेकर है।
लोक सभा चुनाव से पहले समझा जा रहा था की बहुत ही व्यवस्थित ढंग से सर्वे वैगेरह करके भाजपा के प्रत्याशियों को चयनित किया जा रहा था। परन्तु वास्तविकता में सुशील मोदी और उनके गुट के नेता सब कुछ मैनेज कर रहे थे। और इसमें पैसों का ज़बरदस्त खेल था। यहाँ तक की पासवान-कुशवाहा को हैसियत से अधिक सीटें देने के पीछे पैसों की ही सेटिंग थी।
मधेपुरा से, जहाँ से मैं भी दावेदारी कर रहा था, वहाँ पता चला की नितीश सरकार की मंत्री रेनू कुशवाहा के पति, जिनका एक मात्र योगदान और परिचय यही है, को 4 करोड़ के सौदे में सुशील मोदी ने टिकट दिलवा दी।
मधेपुरा में यादवों की बड़ी संख्या और राजद उम्मीदवार पप्पू यादव और जद(यू) प्रत्याशी शरद यादव थे।
इस अनर्गल फैसले का विरोध मधेपुरा और सहरसा जिला भाजपा इकाई ने पुरजोर तरीके से किया। सर्वसम्मति से पारित प्रस्ताव कहा गया कि," मधेपुरा लोक सभा क्षेत्र से घोषित भा ज पा प्रत्याशी का संगठन के पंचायत स्तर से लेकर सहरसा और मधेपुरा ज़िला इकाई के एक एक कार्यकर्ता द्वारा विरोध हो रहा है और इकाइयों द्वारा चरणबद्ध आंदोलन भी हो रहा है।
श्रीमान से नम्र निवेदन है कि तत्काल केन्द्रीय नेतृत्व का एक शीर्ष नेता को ज़मीनी जानकारी लेने के लिए भेजा जाय और तब मधेपुरा से घोषित भा ज पा प्रत्याशी पर अंतिम निर्णय लिया जाय।
ज़िला इकाईयां किसी एक को टिकट देने के बारे में कोई माँग नहीं कर रही है, पर घोषित प्रत्याशी को बदलने कि मांग कर रहें हैं।
मधेपुरा संसदीय क्षेत्र में कुल वोटर संख्या 1507610 (पंद्रह लाख छिहत्तर हज़ार छह सौ दस) है। जिनमें 789566 पुरुष और 718044 महिला है।
एक अनुमान के अनुसार इनमें लगभग 5 लाख यादव मतदाता हैं। मुसलमान और दलित लगभग 2 - 2. 50 लाख हैं। यादव छोड़ अन्य पिछड़ी जातियाँ भी लगभग 3 लाख हैं। अन्य पिछड़ी जातियों में कोइरी सबसे कम लगभग 30 - 35 हज़ार हैं। वैश्य लगभग 1 लाख हैं। ब्राह्मणों की संख्या भी लगभग 78 हज़ार और राजपूत की संख्या भी लगभग 79 हज़ार है।
ऐसी परिस्थिति में मधेपुरा कि सीट पर किस समीकरण से कुशवाहा, जो मधेपुरा का है भी नहीं, और जिसे मधेपुरा के 200 लोग भी नहीं जानते हैं, उसे उम्मीदवार बनाया गया है, यह आम कार्यकर्ताओं के समझ से परे है, और भा ज पा को इससे आस पास के सभी सीटों पर नुकसान हो रहा है।
अतः आशा है की तमाम कार्यकर्ताओं के इस अनुरोध पर गहराई से विचार करेंगे और संगठन के हित में फैसला लेंगे।"
परन्तु किसी तरह की कोई कार्यवाई नहीं हुई।
नतीजा हुआ की मधेपुरा सीट पार्टी हार गयी और साथ में यह मानते हुए की राजनैतिक रूप से संवेदनशील मधेपुरा का असर दूसरे क्षेत्रों पर भी हुआ होगा, भाजपा सुपौल, पूर्णियां, अररिया, कटिहार, किशनगंज, भागलपुर, बाँका भी हार गयी। लेकिन मोदी लहर में जीत के जूनून में इस पर ध्यान देना ज़रूरी नहीं समझा गया।
अभी विधान सभा में सुशील जी के सीधे हस्तक्षेप से मधेपुरा विधान सभा क्षेत्र से एक विवादास्पद व्यक्ति को टिकट दिया गया, जो माना जाता है की ढाई करोड़ उन पर न्योछावर किया। जनाब 40 हज़ार वोटों से हारे हैं।
तो अब हम यही देखना चाहेंगे कि क्या कार्यवाई होती है।

Thursday, December 6, 2012

राज्य सभा में FDI पर अरूण जेटली का प्रभावी भाषण -

आज राज्य सभा में नेता विपक्ष अरुण जेटली ने सिलसिलेवार ढंग से FDI पर मनमोहन सरकार के सभी दावों को निरस्त कर दिया। उन्होंने ने याद दिलाया की यही डा मनमोहन सिंह ठीक एक दशक पहले 6 दिसंबर,2002 को FDI को ख़ारिज करते हुए सदन में कहा था की इससे छोटे दुकानदार, रेहड़ी पटरी वालों के रोज़गार पर विपरीत असर होगा, बेरोज़गारी बढ़ेगी और हिंदुस्तान के लिए उपयुक्त नहीं है। अंतराष्ट्रीय व्यापारिक रियायतों में हमेशा कोई भी देश बदले में कुछ रियायतें प्राप्त करता है, जो दिख नहीं रहा है। सबसे महत्वपूर्ण, लगभग 12 वर्षों से हिंदुस्तान पर रिटेल में FDI लागू करने का अमरीकी दबाब है, परन्तु पता नहीं क्यों पिछले सत्र तक 'आम सहमती' बनाने की बात करने वाली सरकार अचानक इसे लागू कर दिया?

अरुण जेटली ने 'सुधार' के पश्चिमी परिभाषा को चुनौती देते हुए कहा की अमरीका भारत में नौकरियों के आउटसोर्स किये जाने को समाप्त करने की बात कर जब चाहे 'सुधार' को ठेंगा दिखा देता है, लगभग सभी पश्चिमी देश अपने किसानों को वालमार्ट जैसे स्टोर से निपटने के लिए और बाज़ार में अपने उत्पाद की सही कीमत दिए जाने ले लिए प्रतिदिन हजारों डॉलर सब्सिडी देता है, परन्तु हमें मना किया जाता है। ऐसे 'सुधार' को लागू नहीं करना हीं राष्ट्र हित में है।

यह अत्यंत हास्यास्पद हीं है की सत्ता पक्ष इस मुद्दे को ऐसे प्रस्तुत कर रहा था जैसे वालमार्ट कोई धार्मिक या स्वयंसेवी संस्था हो जो भारत आकर यहाँ परोपकार और लोक-कल्याण के कार्य करना चाहती है, और विपक्ष उन्हें रोक रहा है। अगर कांग्रेस नीत यु पी ए सरकार को खुली छूट मिले तो यह कहते हुए की यह भवन बहुत पुरानी हो चुकी है, संसद भवन को हीं वालमार्ट को स्टोर खोलने के लिए बेच दें।

वैसे जो लोग लोक सभा में इस मुद्दे पर अरुण जेटली के विद्यार्थी जीवन के समकालीन लालू प्रसाद अथवा अन्य कांग्रेसी वकील कपिल सिब्बल का भाषण भी सुने हों उन्हें फर्क पता चल गया होगा।



ध्यान दिलाना चाहूँगा की जब लालू प्रसाद पटना विश्वविद्यालय छात्र संघ के अध्यक्ष थे, उन्ही दिनों श्रीराम कालेज ऑफ़ कॉमर्स के विद्यार्थी अरुण जेटली भी दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ के अध्यक्ष थे। दोनों 1974 में कांग्रेस और इंदिरा गाँधी द्वारा जबरन आपातकाल लागू कर तमाम विपक्ष के नेताओं को जेल भेजे जाने के विरोध में जय प्रकाश नारायण के आन्दोलन में शामिल थे। दोनों नेता कनून की डिग्री प्राप्त किये हैं। और जब 1977 में जनता पार्टी का गठन हुआ तो अरुण जेटली जनता पार्टी के सबसे युवा राष्ट्रिय कार्यकारिणी के सदस्य थे। परन्तु 1977 वे चुनाव नहीं लड़े। लालू प्रसाद को 1977 में बिहार में जनता पार्टी संसदीय दल के अध्यक्ष स्व बी पी मंडल ने, जय प्रकाश बाबु के अनुशंसा पर और बाबु सत्येन्द्र नारायण सिंह और कर्पूरी ठाकुर के आपत्ति के बावजूद, 'राजपूत सीट' छपरा से लोक सभा का टिकट दिया जहाँ से वे छोटे उम्र में सांसद चुने गए।